|
वैश्विक मानव संसाधन कंपनी हेविट एसोसिएटस ने कहा है कि अधिकांश भारतीय कंपनियां विशेषकर बुनियादी ढांचा तथा ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां इस साल बड़े पैमाने पर नियुक्तियों की योजना बना रही हैं। हेविट के भारत में प्रमुख अधिकारी संदी चौधरी के अनुसार एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला गया। इसमें शामिल 93.4 प्रतिशत कंपनियां ने कहा कि इस साल वे नियुक्तियों में वृद्धि की उम्मीद कर रही हैं। दूरसंचार, तेल व गैस तथा बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनियां बड़े पैमाने पर नियुक्तियां करेंगी।
उल्लेखनीय है कि आईटी क्षेत्र की टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो तथा महिंद्रा सत्यम जैसी प्रमुख कंपनियों ने हाल ही में नियुक्ति योजना की घोषणा की। चौधरी ने कहा कि घरेलू वृद्धि व खपत पर आधारित क्षेत्रों में आर्थिक सुधार अपेक्षाकृत तेज रहा है। वहीं वैश्विक निर्भरता वाले क्षेत्रों में सुधार इस साल मध्य तक जोर पकड़ेगा। हेविट का मानना है कि 2010 में ऐसी कंपनियों की संख्या में भारी कमी आएगी जो नए सिरे से नियुक्तियां नहीं करेंगी। इसी तरह छंटनियां भी इस साल घटकर 3.5 प्रतिशत रह जाएगी, जो 2009 में 16 प्रतिशत रही थी।
इंक्रिमेंट का धमाका
इस साल नौकरी के साथ साथ इंक्रिमेंट का इंतजार कर रहे लोगों केलिए अच्छी खबर आ रही है। वैसे भी पिछले साल यानी 2009 में बहुत कम सैलरी हाइक, जीरो हाइक या फिर सैलरी कट के बाद उम्मीद है कि 2010 में हालात सुधरेंगे। एक सर्वे में इस बार डबल डिजिट में सैलरी बढ़ोतरी का अंदाजा लगाया गया है। ग्लोबल ह्यूमन रिसोर्स सर्विस फर्म हेविट असोसिएट्स के 14वें सालाना सैलरी इंक्रीज सर्वे के मुताबिक भारत में 2010 में 10.6 पर्सेंट सैलॅरी बढ़ सकती है। यह एशिया पैसिफिक में सबसे ज्यादा और 2009 से 60 पर्सेंट ज्यादा है।
2008 में सैलॅरी में 13.3 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई थी। एनर्जी, टेलिकम्युनिकेशन, फॉर्मा, ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रॉक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा 11.6 से 12.8 पर्सेंट के बीच सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीद है। टेक्नोलॉजी और आउटसोर्सिंग में तेजी से सुधार हुआ है, लेकिन इनमें 8.5 से 8.9 पर्सेंट के बीच और शिपिंग एंड लॉजिस्टिक में 7.6 पर्सेंट सैलरी बढ़ेगी।
बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर जो स्लो डाउन में सबसे ज्यादा प्रभावित थे, अब 10.5 पर्सेंट का तोहफा देने जा रहे हैं। रिटेल में 11.1 और मीडिया सेक्टर में 10.2 से 10.5 पर्सेंट के बीच बढ़ोतरी प्रोजेक्ट की गई है। भले ही हालात 2008 या उससे पहले जितने अच्छे नहीं है, लेकिन 2009 के मुकाबले काफी सुधार की उम्मीद है। वर्ष 2009 में जितनी सैलरी बढ़ी उसके मुकाबले महंगाई करीब दोगुनी बढ़ी जिसने जीना मुहाल कर डाला। 2009 में जीडीपी 6.7 पर्सेंट और महंगाई 10.9 पर्सेंट रही और सैलरी बढ़ोतरी सिर्फ 6.6 पर्सेंट हुई। बहुत से सेक्टर में बिल्कुल सैलरी नहीं बढ़ी और कई जगह सैलरी में कटौती भी हुई। 2010 के लिए अनुमान है कि जीडीपी 7.2 पर्सेंट और महंगाई 9.6 पर्सेंट रहेगी। इसके मुकाबले सैलरी 10.6 पर्सेंट बढ़ेगी जो महंगाई से थोड़ी ज्यादा होगी।
इस साल सैलरी कट, छटनी और हायरिंग फ्रीज भी कम होगी। 2009 में 7.4 पर्सेंट ऑर्गनाइजेशन के मुकाबले इस बार महज 0.7 पर्सेंट ने सैलरी कट की संभावना जताई है। 2.4 पर्सेंट ने सैलरी फ्रीज, 3.5 पर्सेंट ने नौकरी से निकालने और 6.6 पर्सेंट ने हायरिंग फ्रीज करने की सोची है। 2009 में 22.4 पर्सेंट ऑर्गनाइजेशन ने सैलरी फ्रीज, 16 पर्सेंट से छटनी और 29.4 पर्सेंट ने हायरिंग फ्रीज की थी।
|