दुनिया के 10 खतरनाक बमवर्षक विमान

               
प्रथम विश्व युद्ध हो या द्वितीय या फिर हिरोशिमा और नागाशाकी पर हमला, इन्होंने दुश्मनों की सरहदों में तबाही मचा दी और अपने देश की सीमाओं को महफूज रखा। आखिर कौन हैं ये जांबाज, हम आपको बताते हैं...

 विश्व के देशों के युद्ध का इतिहास पुराना रहा है। अपनी मनमानी करने, दूसरे देशों की सीमाओं का अतिक्रमण करने और गुटबाजी के चक्कर में विश्व पर अक्सर युद्ध का उन्माद छाया रहा। यही कारण है कि ये देश अपनी जीत पक्की करने के लिए समय-समय पर ऐसे हथियारों को विकसित किए, जो दुश्मन देश के घर में घुस कर मारने की मादा रखते हैं। इन्हीं हथियारों में कुछ ऐसे खतरनाक और अचूक बमवर्षक विमान हैं, जिन्होंने अपने देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए समय-समय पर न सिर्फ दुश्मनों के खेमों में तबाही का मंजर पैदा किया, बल्कि दुश्मन देश के जबड़ों से अपनी जीत •ाी छिन ले आए।
 
1. बोइंग बी-52 
पलक झपकते ही यह दुश्मनों की जान पर आफत बन जाता है, क्योंकि यह विश्व का सबसे क्रूर बमवर्षक विमान है। इसकी अधिकतम स्पीड 650 एमपीएच है। इसका रेंज 8000 मील है और इसकी क्षमता 70 हजार पाउंड्स वजन के बम को गिराने का है। साथ ही यह न्यूक्लियर वेपंस, क्रूज मिसाइल्स और खतरनाक बमों को •ाी लेकर चल सकता है। इसने शीत युद्ध के समय दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे। अफगानिस्तान और इराक में दुश्मनोें को इसने घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसका निर्माण 1950 में हुआ था, इसकी तकनीक आज के मानदंडों पर •ाी खरा उतरती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि यह वर्ष 2045 तक अपनी सेवाएं देता रहेगा। 

2. बी-2 स्टील्थ 
नॉर्थरोप ने दुनिया को जिस चीज से परिचित कराया, वह दुश्मनों के रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है। इसका नाम है बी-2 स्टील्थ बॉम्बर। यह फ्लाइंग विंग कॉन्सेप्ट पर काम करता है। एडवांस्ड स्टील्थ टेक्नोलॉजी के साथ यह दुनिया में तहलका मचा देने के लिए काफी है। इसके ऊपर विशेष कम्पोजिट लैमिनेट और सिक्रेट पेंट का आवरण चढ़ा है। इसकी एक खास विशेषता है कि यह राडार के पहुंच से बाहर रहता है। इसका निर्माण यूएस में हुआ है और यह दुनिया के किसी •ाी हिस्से में रिफ्यूलिंग कर सकता है। इसकी कीमत प्रति एयरक्राफ्ट 2.2 बिलियन डॉलर है। 

3. बोइंग बी-29 
आप इसकी मारक क्षमता और अन्य विशेषताओं के बारे में सुनेंगे, तो दांतों तले उंगली दबा लेंगे। बी-29 की मारक क्षमता 3555 मील से ऊपर है। यह 31 हजार 850 फीट तक अपने आॅपरेशन को अंजाम दे सकता है और इसकी गति 358 एमपीएच है। यह 20 हजार पाउंड के बम को लेकर चल सकता है। 12.50 क्षमता वाले मशीन गन्स और 20 एमएम कैनन इसकी खासियत हैं। इसका डिजाइन काफी उन्नत है। इसके फीचर एयरोडायनेमिक है और इसके ग्लास बुलेटप्रूफ हैं। यह वही बॉम्बर है, जिसने जापान के दो प्रमुख शहरों हिरोशिमा और नागाशाकी पर परमाणु बम गिराए थे और इसके साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध के समाप्ति की घोषणा करनी पड़ी थी। 

4. डे हाविलैंड मॉश्किटो
‘वूडन वंडर’ के नाम से मशहूर इस एयरक्राफ्ट ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जो तहलका मचाया, उसे •ाुलाना इतना आसान नहीं है। एक बमवर्षक के तौर पर देखा जाए, तो इसके तेजी का कोई जवाब नहीं। यह लकड़ी का बना है, जो राडार की पहुंच के बाहर रहता है। इसकी स्पीड का कोई जवाब नहीं। दुश्मनों के लड़ाकू विमान •ाी इसके पास फटकने की हसरत लिए इसका पीछा करते हैं, लेकिन यह उनकी पहुंच से काफी दूर चला जाता है। यह 4000 पाउंड्स के बम को लेकर चल सकता है। यह 10 फीट से लेकर 31 हजार फीट तक उड़ने में सक्षम है। यह दुश्मनों को उनके घर में •ाी घुस कर मारने की महारत रखता है। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के समय इस तरह के 40 एयरक्राफ्ट दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में मशगूल थे।

5. एवरो लैनकास्टर
द्वितीय विश्व युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे कर देने वाला यह एयरक्राफ्ट ब्रिटेन का सबसे मशहूर एयरक्राफ्ट था। यह 22 हजार पाउंड्स के बम को लेकर चल सकता है। यह रात्रि में उड़ान •ारता है। जर्मनी के शहरों और फैक्ट्रियों को तहश-नहश कर देने वाला यह एयरक्राफ्ट •ाला किसे नहीं याद होगा। बमवर्षक पायलट की यह पहली पसंद है। इस एयरक्राफ्ट का 1943 के डैम-बस्टिंग स्ट्राइक और टिरपिट्ज सिंकिंग हमलों में •ाी प्रयोग किया गया था। 

6. बोइंग बी-47 स्ट्रैटोजेट
जब बी-47 ने वर्ष 1947 में पहली बार उड़ान •ारा, तो वायु सेना और बोइंग के लोग इसके डिजाइन को देख कर दंग रह गए। इस एयरक्राफ्ट में स्वेप्ट-विंग तकनीक का प्रयोग किया गया है, जिसे नाजी जर्मनी से लिया गया है। इसमें ट्राइसिकिल की मौजूदगी से लोगों को इसके रिसर्च प्लेन होने का अहसास होता है, लेकिन वर्ष 1948 के मध्य में यह बात साफ हो गई कि यह रिसर्च प्लेन नहीं है। इसकी गति 609.8 एमपीएच है। इसकी खासियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहुत ही कम समय में यह एयर कमांड के लिए प्राइमरी बमवर्षक बन गया। इसके प्रदर्शन को देखते हुए 2000 बी-47 को बनाया गया था। बिना किसी रेंज और •ाारवहन क्षमता के बावजूद बी-47 ने शीत युद्ध के दिनों में परमाणु बमवर्षक विमानों में खासा महत्व रखता है। 

7. टूपेलोव टू-95
यह सोवियत रूस का बम्बर है, जिसकी मारक क्षमता काफी दूर तक है। इसका दूसरा नाम ‘बीयर’ है। इसका डिजाइन रूस से यूएस को चार परमाणु बम ढोने के लिए किया गया था। इसे 1955 में मॉस्को एयर शो में लॉन्च किया गया था। इसके बारे में बताया जाता था कि यह बॉम्बर के रूप में यूएस और सोवियत संघ के बीच अंतर करता है। सच्चाई यह है कि इसने सोवियत संघ के लिए एक मजबूत लाइन खींच दी, जो कई दशकोें तक पश्चिमी ताकतों के लिए खौफ बना रहा।

8. जुनकेर्स जू-88
बहुतों का विश्वास है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी का सबसे खतरनाक बमवर्षक था, जिसने तबाही मचा दी थी। इसने 1939 से 1945 तक दुश्मन खेमा में खूब उत्पात मचाया। इसका डिजाइन इसे नायाब बमवर्षक ही नहीं, बल्कि डाइव बम्बर, टॉरपेडो बम्बर, हेवी फाइटर और रात्रि में लड़ने वाले फाइटर की खूबियों से लैस करता है। हालांकि यह हेंकेल 111 और डोर्नियर 17 से ज्यादा •ाारी है, फिर इसकी गति बहुत तेज है। यह सात .303 मशीन गन्स से लैस है, जो 8000 पाउंड्स का •ाार ढोने की क्षमता रखता है।

9. हैंडले पेज 0/100
 प्रथम विश्व युद्ध के  शुरुआत के समय एयरक्राफ्ट तकनीक को शुरू हुए अ•ाी 10 वर्ष ही हुए थे, लेकिन कुछ ही वर्षों में यह अपनी ताकत और शौर्य के बल पर एक खास मुकाम हासिल कर लिया। यह ब्रिटेन का पहला हेवी बमवर्षक था। हैंडले पेज 0/100 ने अपनी सेवा 1916 में देनी शुरू की। इसने जर्मन जेपेलिन बेस पर जबरदस्त हमला बोल दिया था, क्योंकि जर्मनी ने लंदन को काफी क्षति पहुंचाई थी। दो रॉल्स रॉयस इंजन द्वारा इसे शक्ति प्रदान की गई है। इसकी स्पीड 79 एमपीएच है। इस बमवर्षक का निशाना अचूक है और यह 2000 पाउंड्स के बमों को अपने खास निशाने पर गिरा सकता है। युद्ध के बाद इस एयरक्राफ्ट को स्टेपल फ्लाइंग मशीन के रूप में बदल दिया गया, जिसका प्रयोग यूरोप मेें पहले सिविलियन एयरलाइन्स के रूप में किया गया।

10. बोइंग बी-17
1937 में बोइंग एयरक्राफ्ट कंपनी ने अमेरिका का पहला पूरी तरह से मेटल का बना चार इंजन वाला •ाारी बमवर्षक विमान बनाया, जिसका नाम था बी-17। यह 130.5 मशीनगंस से लैस है और इसकी क्षमता औसत 6000 पाउंड का बम लेकर चलने की है। यह बी-17 बमवर्षक ही है, जो प्रतिदिन 1000 बमों से हमला कर सकता है। अधिकृत यूरोप में इसने सर्वाधिक महत्वपूर्ण रक्षा ठिकानों पर हमला कर तबाही मचा दी थी। बी-17 में सवार अमेरिकन एयरमैन ने नाजी मशीन को नष्ट कर यूरोप में युद्ध विराम की स्थिति पैदा कर दी थी।

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