गैरजरूरी कदम: राम मंदिर न्यास की जमीन को वापस सौंपने के ऊपर

               

An unnecessary move: on handing back land to Ram temple trust 

 गैरजरूरी कदम: राम मंदिर न्यास की जमीन को वापस सौंपने के ऊपर

 

Handing back land to the Ram temple trust has no justification at this juncture

राम मंदिर न्यास को इस समय जमीन वापस करने का कोई औचित्य नहीं है

The Centre’s request to the Supreme Court to allow it to return the “superfluous land” it had acquired around the disputed site in Ayodhya in 1993 is not innocuous; nor is it justified at this juncture. केंद्र के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को किया गया आवेदन की अयोध्या में विवादित स्थल के चारों तरफ अतिरिक्त जमीन जो कि 1993 में अधिग्रहित कर लिया गया था, उसे वापस कर दिया जाए वह ना तो अहानिकारक है नाहि इस समय सही ठहराया जा सकता ।

 

The court had ordered that the status quo be maintained on the entire extent of 67.7 acres acquired in the aftermath of the demolition of the Babri Masjid.  न्यायालय ने बाबरी मस्जिद ढाह दिए जाने के बाद यह आदेश दिया था कि पूरे 67.7 एकड़ जमीन जो की अधिकृत किया गया था उस पर यथास्थिति बनाए रखा जाए ।

 

Behind the apparently equitable argument that an extent of land not in dispute can be given back to its original owners is a barely concealed political motive. जाहिर तौर पर इस न्याय संगत तर्क के पीछे की जो जमीन विवाद में नहीं है उसे मूल मालिक को वापस कर दिया जाए के पीछे छिपा हुआ राजनीतिक इरादा है

 

BJP leader Ram Madhav has said, “In view of the strong popular sentiment attached to the Ram Mandir, it is the least that the government could do.बीजेपी के नेता राम माधव ने कहा की “ लोगों की मजबूत लोकप्रिय भावना जोकि राम मंदिर के साथ जुड़ा हुआ है को देखते हुए सरकार कम से कम यह तो कर सकती है ”

 

 The sense of anxiety among the supporters of the Mandir cause over the delay in the adjudicatory process is palpable; but it is also indicative of an unreasonable expectation that the government should somehow facilitate the construction of a Ram temple regardless of what the court’s decision is. राम मंदिर के लिए समर्थकों में  व्याकुलता न्याय निर्णय में देरी के कारण से महसूस किया जा रहा है लेकिन यह सरकार से गैर तार्किक अपेक्षा की ओर इशारा करता है कि सरकार जैसे तैसे राम मंदिर निर्माण में सहायक हो चाहे न्यायालय का निर्णय कुछ भी रहा हो l

 

 It is to address this anxiety and mollify elements that are unhappy with the progress of the judicial process that the government wants the court to vacate its status quo order. इस व्याकुलता का निपटारा करने तथा ऐसे तत्व जो न्यायिक प्रक्रिया की प्रगति से नाखुश हैं, उनको शांत करने के लिए सरकार चाहती है की यथास्थिति के आदेश को वापस लिया जाए l

It is a move fraught with the risk of reigniting communal passions at a time when the appeals against the Allahabad High Court’s verdict in the title suits have reached the final stage of adjudication before the Supreme Court. यह एक ऐसा कदम है जो कि इस जोखिम से भरा पड़ा है कि यह संप्रदायिक उन्माद को पुनः चिंगारी दे ,खास करके उस समय जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ जो टाइटल सूट (यानी की जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा हुआ केस ) सर्वोच्च न्यायालय में दायर किया गया है, वह अपने न्याय निर्णय के अंतिम चरण में है l

The Centre’s argument is that the Supreme Court, in Ismail Faruqui (1994) had itself said that once the objectives of the acquisition have been achieved, the superfluous area should revert to its owners. केंद्र का यह तर्क है कि इस्माइल फारूकी (1994) के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने खुद यह कहा है कि एक बार जब अधिग्रहण का उद्देश्य पूरा हो जाएगा तो अतिरिक्त क्षेत्र मालिकों को वापस कर दिया जाएगा l

 

 It has also contended that the status quo was required only till the disposal of the suits, which ended in 2010 when the Allahabad High Court decided them.  इसने यह तर्क भी दिया यथास्थिति को बनाए रखने की जरूरत सूट के निपटारे तक था जोकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए निर्णय के साथ 2010 में समाप्त हो गया ।

 

Is the issue really so simple? The court had noted that the adjacent area had been acquired so that the party that succeeds is not denied the fruits of its success by those in the adjacent areas through denial of access. क्या यह मुद्दा वास्तविकता में इतना आसान है ? न्यायालय ने कहा था की आस पास की जमीन को इस कारण से अधिकृत किया जा रहा है कि जो भी पक्ष जीते उन्हें जीत का लाभ मिल सके नाकी आसपास के क्षेत्र के मालिकाना हक वाला व्यक्ति उसे पहुंच देने से इंकार कर दे l

 

 It had said the status quo was required to avoid “reigniting communal passions detrimental to the spirit of communal harmony”. ऐसा कहा गया था कि यथास्थिति की जरूरत सांप्रदायिक उन्माद को पुनः चिंगारी देने से बचने के लिए है जोकि सांप्रदायिक सौहार्द की भावना के लिए हानिकारक है l

 

Further, the trial court’s decision in favour of a three-way partition of the land has not satisfied any of the parties, and the entire suit is once again open for adjudication. और आगे निचली अदालतों का यह फैसला की जमीन को तीन हिस्से में बांट दिया जाए ने किसी भी पक्ष को संतुष्ट नहीं किया और पूरा सूट ही एक बार फिर से न्याय निर्णय के लिए खुल गया  ।

The time is hardly ripe for altering the status quo. समय मुश्किल से उपयुक्त है कि यथास्थिति में फेरबदल किया जाए ।

 

Beyond all this, the idea of giving back 42 acres of land to the Ram Janmabhoomi Nyas, a trust dedicated to the cause of constructing a temple to Ram on the site where the demolished Babri Masjid stood, will be needlessly provocative. इन सब से परे , यह विचार गैर जरूरी रूप से उत्तेजक है की राम जन्मभूमि न्यास को 42 एकड़ भूमि वापस कर दी जाए , जोकि राम मंदिर निर्माण के लिए उस जगह पर कटिबद्ध है जहां पर बाबरी मस्जिद हुआ करता था और उसे ढाह दिया गया l 

 

The trust had obtained its lease in 1992 in the run-up to the campaign to demolish the mosque, from the Kalyan Singh government, whose actions were demonstrably anti-secular. न्यास ने यह जमीन 1992 में बाबरी मस्जिद ढाहे जाने के अभियान से पहले कल्याण सिंह सरकार से प्राप्त किया जिसकी कार्रवाई प्रमाण पूर्वक पंथनिरपेक्ष विरोधी थी ।

 

There is a case for reconsidering the lease, but nothing at all for this organisation to be given the opportunity to gather its resources in the vicinity of the disputed site. इस पट्टे पर पुनर्विचार के लिए तर्क बनता है लेकिन इस संगठन को ऐसा कोई अवसर नहीं दिया जाना चाहिए जिससे कि विवादित स्थल के आसपास यह संसाधनों को इकट्ठा कर सके ।


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